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Atal Bihari Vajpayee is Immortal. He will live forever in the hearts of the people who knew him.

A true Poet, A true Patriot, A True Politician, A true Human and A True Indian, Atal Bihari Vajpayee will remain in the hearts of not only Indians but people from all over the whole world, who ever knew him, for ages to come.

Here are some immortal poems by him-

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”उजियारे में, अंधकार में,
कल कहार में, बीच धार में,
घोर घृणा में, पूत प्यार में,
क्षणिक जीत में, दीर्घ हार में,
जीवन के शत-शत आकर्षक,
अरमानों को ढलना होगा.
कदम मिलाकर चलना होगा.

सम्मुख फैला अगर ध्येय पथ,
प्रगति चिरंतन कैसा इति अब,
सुस्मित हर्षित कैसा श्रम श्लथ,
असफल, सफल समान मनोरथ,
सब कुछ देकर कुछ न मांगते,
पावस बनकर ढलना होगा.
कदम मिलाकर चलना होगा.

कुछ कांटों से सज्जित जीवन,
प्रखर प्यार से वंचित यौवन,
नीरवता से मुखरित मधुबन,
परहित अर्पित अपना तन-मन,
जीवन को शत-शत आहुति में,
जलना होगा, गलना होगा.
क़दम मिलाकर चलना होगा.”

”हरी हरी दूब पर 
ओस की बूंदे 
अभी थी, 
अभी नहीं हैं| 
ऐसी खुशियां 
जो हमेशा हमारा साथ दें 
कभी नहीं थी, 
कहीं नहीं हैं| 

क्‍कांयर की कोख से 
फूटा बाल सूर्य, 
जब पूरब की गोद में 
पाँव फैलाने लगा, 
तो मेरी बगीची का 
पत्ता-पत्ता जगमगाने लगा, 
मैं उगते सूर्य को नमस्कार करूं 
या उसके ताप से भाप बनी, 
ओस की बूंदों को ढूंढूं? 

सूर्य एक सत्य है 
जिसे झुठलाया नहीं जा सकता 
मगर ओस भी तो एक सच्चाई है 
यह बात अलग है कि ओस क्षणिक है 
क्यों न मैं क्षण क्षण को जिऊं? 
कण-कण में बिखरे सौन्दर्य को पिऊं? 

सूर्य तो फिर भी उगेगा, 
धूप तो फिर भी खिलेगी, 
लेकिन मेरी बगीची की 
हरी-हरी दूब पर, 
ओस की बूंद 
हर मौसम में नहीं मिलेगी।”

”ठन गई! 
मौत से ठन गई! 

जूझने का मेरा इरादा न था, 
मोड़ पर मिलेंगे इसका वादा न था, 

रास्ता रोक कर वह खड़ी हो गई, 
यों लगा ज़िन्दगी से बड़ी हो गई। 

मौत की उमर क्या है? दो पल भी नहीं, 
ज़िन्दगी सिलसिला, आज कल की नहीं। 

मैं जी भर जिया, मैं मन से मरूं, 
लौटकर आऊँगा, कूच से क्यों डरूं? 

तू दबे पांव, चोरी-छिपे से न आ, 
सामने वार कर फिर मुझे आज़मा। 

मौत से बेख़बर, ज़िन्दगी का सफ़र, 
शाम हर सुरमई, रात बंसी का स्वर। 

बात ऐसी नहीं कि कोई ग़म ही नहीं, 
दर्द अपने-पराए कुछ कम भी नहीं। 

प्यार इतना परायों से मुझको मिला, 
न अपनों से बाक़ी हैं कोई गिला। 

हर चुनौती से दो हाथ मैंने किये, 
आंधियों में जलाए हैं बुझते दिए। 

आज झकझोरता तेज़ तूफ़ान है, 
नाव भंवरों की बांहों में मेहमान है। 

पार पाने का क़ायम मगर हौसला, 
देख तेवर तूफां का, तेवरी तन गई। 

मौत से ठन गई!”

”कौरव कौन
कौन पांडव,
टेढ़ा सवाल है|
दोनों ओर शकुनि
का फैला
कूटजाल है|
धर्मराज ने छोड़ी नहीं
जुए की लत है|
हर पंचायत में
पांचाली
अपमानित है|
बिना कृष्ण के
आज
महाभारत होना है,
कोई राजा बने,
रंक को तो रोना है|”

May Your soul finds peace.

5 thoughts on “Atal Bihari Vajpayee is Immortal. He will live forever in the hearts of the people who knew him.

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